सीसी रोड बनाने में 14 लाख का ईंट कर दिया खर्च

जिले में मनरेगा घोटाला का मामला प्याज की परत की तरह खुलता जा रहा है। परतावल व घुघली ब्लाक में मनरेगा घोटाले से जुड़े मामले में अभी तक चार केस दर्ज हो चुके हैं। अब जबकि सीडीओ के निर्देश पर सभी लाइन डिपार्टमेंट वाले सरकारी विभाग मनरेगा से जुड़े स्वीकृत कार्य व भुगतान के दस्तावेज को खंगालने में जुटे तो मिठौरा ब्लाक के एक गांव में चौकाने वाला मामला सामने आया। इस गांव में सीसी रोड बनाने में 14 लाख रुपये के ईंट का भुगतान कर दिया गया।

मनरेगा पोर्टल के मुताबिक इस गांव में वर्ष 2019 में पक्की सड़क से 90 मीटर सीसी रोड के निर्माण का भुगतान हुआ है। जबकि ग्रामीणों के अनुसार सड़क वर्षों पहले बन चुकी है। अचरज की बात यह है कि इस सीसी रोड के निर्माण में ईंट भुगतान के लिए दो-दो लाख का सात बाउचर 1 नवंबर 2019 को एमआईएस फीडिंग की गई। 25 नवंबर 2019 को अमन ट्रेडिंग कम्पनी को ईंट के मूल्य का भुगतान किया गया। हैरत वाली बात यह है कि सीसी रोड कंकरीट व सीमेंट के मिश्रण से बनती है। इसमें रिटेनिग वॉल व फाउंडेशन में कुछ ईंट का प्रयोग होता है। लेकिन 90 मीटर लंबी सीसी रोड में 14 लाख रुपये मूल्य के ईंट के इस्तेमाल की बात लोगों को हजम नहीं हो पा रही है। ईंट के वर्तमान बाजार भाव के मुताबिक 14 लाख में 90 ट्राली ईंट मिलेगी। महज 90 मीटर सीसी रोड निर्माण में इतनी भारी संख्या में ईंट का भुगतान गोलमाल की तरफ ही इशारा कर रहा है। इसके पहले सदर क्षेत्र एक गांव में भी वर्ष 2019 के अगस्त माह में चकबंद के निर्माण में बीस लाख रुपये मूल्य के ईंट का भुगतान किया गया है।

ग्राम पंचायत की वर्क आईडी को वन विभाग को ट्रांसफर कर भुगतान

मिठौरा ब्लाक एक गांव में जिस सीसी रोड में 14 लाख के ईंट का भुगतान किया गया है, उस कार्य का मनरेगा वर्क आईडी पहले ग्राम पंचायत को जारी हुई थी। उस वर्क आईडी पर ग्राम पंचायत ने करीब तीन लाख का काम भी कराया था। बाद में उस वर्क आईडी को वन विभाग को ट्रांसफर कर दिया गया। उसके बाद नवम्बर 2019 में 14 लाख के ईंट का भुगतान किया गया।

सीडीओ ने तीन साल के मनरेगा कार्य का तलब किया ब्योरा

मनरेगा घोटाला का मामला सामने आने के बाद सीडीओ गौरव सिंह सोगरवाल ने सख्त रूप अख्तियार किया है। मनरेगा के तहत तीन साल के अंदर स्वीकृत कार्य, भुगतान आदि से जुड़ी जानकारी का ब्योरा सहयोगी विभागों से मांगा है। इससे हड़कंप मचा हुआ है। अफसर से लेकर कर्मचारी अभिलेख खंगाल रहे हैं। इस सूचना के मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कहां-कहां सही कार्य कराया गया है और कहां-कहां फर्जीवाड़ा काम हुआ है?

 

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