जांच शुरू : अब पर्दा उठेगा भेद खुलेगा

बांदा उत्तर प्रदेश: सामुदायिक शौचालयों की स्थिति की वास्तविकता से अब नकाब उठेगा। अब पर्दा हटते ही भेद भी खुल जायेगा, ग्राम पंचायतों में बनाए गए सामुदायिक शौचालयों की गुणवत्ता व मानकों की जांच के लिए शनिवार को लखनऊ से टीम आ गई। इसके साथ ही विभागीय अधिकारी चिंतित नजर आ रहे हैं।
आपको जानकारी दें दें की जांच टीम जिले की 121 ग्राम पंचायतों में सत्यापन करेगी। करीब एक सप्ताह तक टीम का ठहराव यहीं रहेगा। जियो टैगिग से लेकर निर्माण व संचालन से जुड़ी बारीकियों को देखा जाएगा।
गांवों को खुले में शौचमुक्त रखने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। जिले में 469 लक्ष्य के सापेक्ष 444 का निर्माण पूरा होने का दावा किया है। अभी भी करीब 24 से अधिक शौचालयों का काम बाकी है। इनमें 387 हैंडओवर हो चुके हैं। अभी भी आधा सैकड़ा से ज्यादा सामुदायिक शौचालय एनआरएलएम समूहों को हैंडओवर ही नहीं हो पाए। इनकी देखरेख व संचालन का जिम्मा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन समूहों को दिया गया। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता व मानक सहित शौचालयों की क्रियाशीलता का सत्यापन लखनऊ से आई स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की टीम करेगी। 121 ग्राम पंचायतों में टीम के अधिकारी पहुंचकर कार्य की गुणवत्ता, शौचालय का डिजाइन, उसका रखरखाव, संचालन व क्रियाशीलता की जांच करेंगे। साथ ही जियो टैग भी किया जाएगा। विभागीय जानकारी के अनुसार सत्यापन टीम के अधिकारी महुआ विकास खंड की 25, तिदवारी व कमासिन की 20-20, बड़ोखर की 18, बिसंडा व जसपुरा की 13-13 एवं बबेरू की 12 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों की जांच करेंगे। नरैनी विकास खंड को जांच व सत्यापन में शामिल नहीं किया गया। शेष जिले के सभी सातों ब्लाकों में गुणवत्ता परखी जाएगी।

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