उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट फोरम का प्रयास रंग ला रहा है

उत्तर प्रदेश: प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ द्वारा वनटांगिया समाज और मुसहर विकास के बाद इस अंचल में ईको पर्यटन के केंद्र के रूप में गोरखपुर-सोहगीबरवा इको टूरिज्म सर्किट का विकास करना इस अंचल के भविष्य के लिये मील का पत्थर साबित होगा और हमें ख़ुशी है कि उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट फोरम का प्रयास रंग ला रहा है । यह कहना है फोरम के अंतराष्ट्रीय चेयरमैन और निचलौल निवासी सीए पंकज जायसवाल का । ज्ञात हो की सोहगी बरवा वन्य जीव अभ्यारण्य बोर्ड बने और इको पर्यटन का यह विश्व में रामायण सर्किट एवं बुद्ध सर्किट के यात्रियों के लिये यह एक केंद्र बने समेत 18 सूत्रीय विस्तृत डीपीआर योजना फोरम के अंतर्राष्ट्रीय चेयरमैन श्री जायसवाल द्वारा विगत मार्च माह में मुख्यमंत्री कार्यालय और शासन को भेजा गया था तथा जिले में यह डीपीआर योजना फोरम के जिलाध्यक्ष अमित अंजन द्वारा तत्कालीन जिलाधिकारी को भी दिया गया था। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा यह योजना प्रमुख सचिव पर्यावरण वन एवं जलवायु एवं उनके द्वारा यह योजना महा निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक से होते हुये क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी के पास आई।

दिनांक 29 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश के तीन इको टूरिज्म सर्किट में से एक गोरखपुर-सोहगीबरवा इको टूरिज्म के ड्राई रन के लिये हरी झंडी दिखाना मतलब यहां के भविष्य को हरी झंडी दिखाना है। यूपीडीएफ का मानना है कि सोहगी बरवा वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र अपने अंदर पर्यटन की तमाम संभावनाओं को समेटे हुए है, और टूरिज्म के क्षेत्र में दुनिया के मानचित्र में अंकित होने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री की यह दृष्टि ना वरन इस क्षेत्र बल्कि आसपास के एक बड़े क्षेत्र, 5 लाख से ज्यादे जनसँख्या को लाभान्वित करेगी तथा यह क्षेत्र भारत के अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र में एक टिमटिमाते हुए तारे की तरह नजर आएगा। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन के साथ साथ राजस्व की आय के साथ साथ पूरे क्षेत्र का आर्थिक एवं सामाजिक परिदृश्य बदल जायेगा. दो देशों भारत और नेपाल एवं दो प्रदेशों उत्तर प्रदेश बिहार के संधि स्थल पर स्थित सोहगी बरवा वन्य जीव अभ्यारण्य इको टूरिज्म का यह क्षेत्र इस पूरे क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक उन्नयन के साथ साथ देश एवं प्रदेश के उन्नयन का केंद्र भी बनेगा। यह पूरा क्षेत्र ऐतिहासिक, पौराणिक इतिहास समेटे हुए पर्यटन की लिहाज से अति समृद्धशाली क्षेत्र है।

वर्तमान में यहां प्रतिदिन 500 से 600 सैलानी सिर्फ मगरमच्छों को देखने आते हैं जिसकी संख्या सुविधाओं का विस्तार कर बढ़ाया जा सकता है. यह क्षेत्र रामायण और बौद्ध सर्किट का महत्वपूर्ण पड़ाव भी है। यहां जंगल सफारी, बटरफ्लाई पार्क, एडवेंचर पार्क, रिवर राफ्टिंग, नदी नहर भ्रमण,मगरमच्छ पार्क, ट्राम वे दर्शन, इटहिया पंचमुखी शिव मंदिर, कुडिया देवी मंदिर दर्शन, टिकुलहिया देवी दर्शन यात्रा का प्रचार प्रसार कर पर्यटकों को कई विकल्प दिए जा सकते हैं।

यूपीडीएफ के सलाहकार डॉ राम उपाध्याय का कहना है कि सामाजिक संभावनाओं में इको टूरिज्म विकसित होने से सिर्फ स्थानीय ग्रामसभा ही नहीं पूरे क्षेत्र का विकास सुनिश्चित होगा, करीब करीब 2 लाख की आबादी जिसमें १०० गांव और तीन नगर पंचायते निचलौल, सिसवा और खड्डा ऐसी हैं जो सीधे तौर पर लाभान्वित होंगी, अप्रत्यक्ष रूप से 5 लाख की आबादी लाभान्वित होंगी। स्थानीय मुसहर समाज और वनटांगिया समाज का आर्थिक और सामाजिक उन्नयन संभव हो पायेगा और ये विकास की मूल धारा से जुड़ पाएंगे। स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं व्यापार की व्यापक संभावनाएं पैदा होंगी। रोजगार एवं व्यापार की व्यापक संभावनाएं होने से अपराध की संख्या कम और ख़त्म होगी और व्यक्तिगत पारिवारिक एवं सामाजिक जीवनस्तर में सुधार होगा।

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